अध्याय 3: मौत से होड़
अध्याय 3: मौत से होड़
आर्यन ने घड़ी देखी। सुबह के 10:30 बज रहे थे। उसकी बहन, स्नेहा का कॉलेज यहाँ से 4 घंटे की दूरी पर था और एक्सीडेंट का वक्त था—दोपहर 2:40। यानी आर्यन के पास एक मिनट भी बर्बाद करने का समय नहीं था।
उसने अपनी कार की चाबी उठाई और बाहर की तरफ भागा। जैसे ही उसने कार स्टार्ट की, उसकी नज़र डैशबोर्ड पर लगे कार-रेडियो पर गई। उसका कलेजा मुंह को आ गया जब उसने देखा कि कार बंद होने के बावजूद रेडियो का डिजिटल डिस्प्ले चमक रहा था और उस पर लाल अक्षरों में लिखा था: "235 मिनट शेष।"
आर्यन ने कांपते हाथों से स्टेयरिंग थामी और एक्सीलेटर पर पैर रख दिया। कार सड़क पर हवा से बातें करने लगी।
दोपहर 1:15 बजे...
आर्यन ने आधा रास्ता पार कर लिया था। तभी अचानक कार के स्पीकर्स से वही भारी, कर्कश आवाज़ गूँजी:
"ज़रा तेज़ आर्यन... अगर तुम 120 की रफ्तार से नीचे गए, तो स्नेहा की साँसे रुक जाएंगी। लेकिन याद रखना, सड़क पर तुम अकेले नहीं हो।"
आर्यन का पसीना बहकर उसकी आँखों में जा रहा था। तभी उसने सामने देखा, एक बड़ा ट्रक गलत दिशा से उसकी तरफ आ रहा था। उसने ज़ोर से कट मारा, कार सड़क के किनारे लगे एक पत्थर से टकराते-तकराते बची। रेडियो से एक ज़ोरदार ठहाका सुनाई दिया।
दोपहर 2:30 बजे...
आर्यन शहर की सीमा में दाखिल हो चुका था। ट्रैफिक बहुत ज़्यादा था। वह पागलों की तरह हॉर्न बजा रहा था। घड़ी की सुइयां अब उसके दिल की धड़कन के साथ मुकाबला कर रही थीं।
2:38 PM: वह स्नेहा के कॉलेज वाले चौराहे के पास पहुँचा। दूर से उसे स्नेहा दिखी, जो अपने दोस्तों के साथ हँसती हुई बस स्टॉप की तरफ बढ़ रही थी। वह अपने फोन में मगन थी और दुनिया से बेखबर।
2:39 PM: आर्यन ने चिल्लाने की कोशिश की, "स्नेहा! रुको!" लेकिन उसकी आवाज़ ट्रैफिक के शोर में दब गई। तभी उसने देखा—एक बेकाबू डंपर ट्रक तेज़ रफ्तार में चौराहे की तरफ बढ़ रहा था, जिसके ब्रेक फेल लग रहे थे।
आर्यन ने अपनी कार को बीच सड़क पर डालने का फैसला किया ताकि वह ट्रक को स्नेha तक पहुँचने से रोक सके। रेडियो से आवाज़ आई: "5... 4... 3..."
आर्यन ने अपनी आँखें बंद कीं और एक्सीलेटर दबा दिया। एक ज़ोरदार टक्कर की आवाज़ हुई... कांच टूटने का शोर गूँजा... और फिर सब कुछ शांत हो गया।
ट्विस्ट (The Twist):
जब आर्यन ने आँखें खोलीं, उसने देखा कि वह सुरक्षित था। टक्कर हुई थी, लेकिन उसकी कार से नहीं। वह डंपर ट्रक एक बिजली के खंभे से टकरा गया था। स्नेहा और उसके दोस्त सुरक्षित थे। आर्यन ने राहत की साँस ली और कार का रेडियो बंद करने के लिए हाथ बढ़ाया।
तभी रेडियो से एक ठंडी फुसफुसाहट आई:
"बचा लिया? तुम्हें लगा तुमने उसे बचा लिया? आर्यन... घड़ी देखो। दोपहर के 2:40 नहीं... रात के 2:40 हो रहे हैं। तुम अभी भी अपने बिस्तर पर सो रहे हो... और ये सब तुम्हारा एक सपना है जो अब सच होने वाला है।"
जैसे ही आर्यन ने अपनी कलाई देखी, उसकी घड़ी के कांटे पीछे की तरफ घूमने लगे। अचानक उसकी आँख खुली। वह अपने बिस्तर पर था, पसीने से लथपथ। कमरे में अंधेरा था। और मेज पर रखा वह पुराना रेडियो बज रहा था...
रात के ठीक 2:35 बज रहे थे।

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