Posts

Image
 एक पुराना रेडियो अध्याय 2: वह वापस आ गया आर्यन का पूरा शरीर कांप रहा था। वह टूटी हुई रेलिंग की जगह को घूर रहा था जहाँ से कॉफी का मग गिरकर चकनाचूर हो गया था। अगर वह रेडियो की बात न मानता, तो आज मग की जगह वह खुद नीचे होता। उसने आव देखा न ताव, कमरे में जाकर उस पुराने रेडियो को उठाया। वह लकड़ी का डिब्बा अब उसे किसी शैतान की आंख जैसा लग रहा था। उसने उसे एक काले बोरे में लपेटा, रस्सी से बांधा और घर से दो किलोमीटर दूर एक पुराने कुएं के पास ले जाकर फेंक दिया। "अब देखता हूँ तू कैसे बजता है," आर्यन ने हांफते हुए कहा और घर लौट आया। रात के ठीक 2:55 बजे... आर्यन ने अपने कमरे के सारे दरवाजे और खिड़कियां अंदर से बंद कर ली थीं। उसने सोचा कि आज वह सोएगा नहीं। उसने हाथ में एक टॉर्च और एक चाकू ले रखा था। जैसे-जैसे घड़ी की सुइयां 3 की तरफ बढ़ रही थीं, कमरे का तापमान गिरने लगा। अचानक, उसे अपने बिस्तर के नीचे से एक जानी-पहचानी आवाज़ सुनाई दी। 'सरररर... शशशशश....' आर्यन के रोंगटे खड़े हो गए। उसने कांपते हाथों से टॉर्च जलाई और बिस्तर के नीचे रोशनी डाली। उसकी चीख निकल गई। वही काला बोर...

अध्याय 3: मौत से होड़

Image
  अध्याय 3: मौत से होड़ आर्यन ने घड़ी देखी। सुबह के 10:30 बज रहे थे। उसकी बहन, स्नेहा का कॉलेज यहाँ से 4 घंटे की दूरी पर था और एक्सीडेंट का वक्त था—दोपहर 2:40। यानी आर्यन के पास एक मिनट भी बर्बाद करने का समय नहीं था। उसने अपनी कार की चाबी उठाई और बाहर की तरफ भागा। जैसे ही उसने कार स्टार्ट की, उसकी नज़र डैशबोर्ड पर लगे कार-रेडियो पर गई। उसका कलेजा मुंह को आ गया जब उसने देखा कि कार बंद होने के बावजूद रेडियो का डिजिटल डिस्प्ले चमक रहा था और उस पर लाल अक्षरों में लिखा था: "235 मिनट शेष।" आर्यन ने कांपते हाथों से स्टेयरिंग थामी और एक्सीलेटर पर पैर रख दिया। कार सड़क पर हवा से बातें करने लगी। दोपहर 1:15 बजे... आर्यन ने आधा रास्ता पार कर लिया था। तभी अचानक कार के स्पीकर्स से वही भारी, कर्कश आवाज़ गूँजी: "ज़रा तेज़ आर्यन... अगर तुम 120 की रफ्तार से नीचे गए, तो स्नेहा की साँसे रुक जाएंगी। लेकिन याद रखना, सड़क पर तुम अकेले नहीं हो।" आर्यन का पसीना बहकर उसकी आँखों में जा रहा था। तभी उसने सामने देखा, एक बड़ा ट्रक गलत दिशा से उसकी तरफ आ रहा था। उसने ज़ोर से कट मारा, कार सड़क के क...

एक पुराना रेडियो

Image
  एक पुराना रेडियो  अध्याय 1: आधी रात की गूँज शहर के शोर-शराबे से दूर, 'नीलगिरी विला' नाम का वह घर देखने में जितना सुंदर था, अंदर से उतना ही वीरान। आर्यन ने इस घर को इसलिए चुना था क्योंकि उसे अपनी पहली किताब लिखने के लिए शांति चाहिए थी। उसे क्या पता था कि यहाँ की शांति उसे काटने को दौड़ेगी। सामान सेट करते वक्त उसे स्टोर रूम के कबाड़ में वह चीज़ मिली—एक पुराना, भारी लकड़ी का रेडियो। उसका एंटीना मुड़ा हुआ था और कांच पर धूल की मोटी परत जमी थी। आर्यन ने उसे साफ किया और अपने बेडरूम की मेज पर एक सजावट के तौर पर रख दिया। उसने चेक किया था, उसमें न सेल थे, न ही बिजली का तार। वह महज़ एक लकड़ी का डिब्बा था। रात के ठीक 3:00 बजे... आर्यन गहरी नींद में था, तभी एक तेज़ 'सरसराहट' (static) की आवाज़ से उसकी आँख खुल गई। आवाज़ उसी पुराने रेडियो से आ रही थी। आर्यन हकबका कर उठ बैठा। कमरे में अंधेरा था, लेकिन रेडियो के ट्यूनिंग डायल के अंदर एक धुंधली सी लाल रोशनी जल रही थी। "ये कैसे मुमकिन है?" आर्यन ने बुदबुदाते हुए हाथ बढ़ाकर उसे बंद करने की कोशिश की। लेकिन बटन घुमाने पर भी आवाज़ ...